पराई

दिल से अपनी मगर धकड़न से मैं पराई हूँ,
न जाने किस घड़ी में, इस घर में मैं आई हूँ,

आँखों ही आँखों में आँखों में मैं घिर आई हूँ,
सबकी अपनी मगर न जाने कैसे मैं पराई हूँ।।

राही अंजाना


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11 Comments

  1. देवेश साखरे 'देव' - November 23, 2019, 6:43 pm

    वाह

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 23, 2019, 7:20 pm

    सुंदर

  3. Abhishek kumar - November 23, 2019, 10:08 pm

    मस्त

  4. nitu kandera - November 23, 2019, 11:01 pm

    Nice

  5. Neha - November 24, 2019, 7:51 pm

    Wah

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