पहचान लेंगे

किंकणी न बाँधिये
पैरों में अपने,
बिना खन-खनाहट के
पहचान लेंगे।
कभी आजमा के
देख लीजियेगा,
तुन्हें बन्द आंखों से
पहचान लेंगे।


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16 Comments

  1. Chandra Pandey - September 14, 2020, 10:44 pm

    Wow nice poem

  2. Devi Kamla - September 14, 2020, 11:32 pm

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

  3. Suman Kumari - September 14, 2020, 11:42 pm

    सुन्दर

  4. Geeta kumari - September 15, 2020, 6:57 am

    बहुत ही खूबसूरती से अभिव्यक्ति किया है भावों को।
    कम शब्दों में मन के भाव बयां करना कोई आपकी कलम से सीखे।
    ……. सैल्यूट।

    • Satish Pandey - September 15, 2020, 6:15 pm

      इतनी सुन्दर समीक्षा हेतु आपका आभार व्यक्त करता हूँ। आपके द्वारा किया जा रहा उत्साहवर्धन बल प्रदान करता है। बहुत सारा धन्यवाद

  5. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 15, 2020, 9:57 am

    सुंदर

  6. Pratima chaudhary - September 15, 2020, 1:35 pm

    बहुत खूब

  7. Pragya Shukla - September 15, 2020, 3:42 pm

    Waah

  8. MS Lohaghat - September 17, 2020, 7:22 am

    बहुत खूब

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