पिताजी

अपने सुख दुःख की पोटली को
रख किनारे में
हमारे सुख दुःख को
अपना जीवन बनाया
पिताजी ने ही हमे सब कुछ सिखाया

कल तक चलना नहीं आता था
चलना आपने सिखाया
आज ज़िन्दगी की दौड़ में
दौड़ रहा हूँ
संभलना आपने सिखाया
पिताजी ने हमे सब कुछ सिखाया

कभी प्यार से
कभी डांट के
हमे सही गलत का मतलब बताया

खाकर ठोकर
रह ना जाये हमारा दिल कमजोर
इस दिल मजबूत बनाया
पिताजी ने हमे सब कुछ सिखाया


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6 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - June 22, 2020, 11:33 am

    Nice

  2. Pragya Shukla - June 22, 2020, 12:53 pm

    👌

  3. महेश गुप्ता जौनपुरी - June 27, 2020, 8:01 am

    वाह ््व््््व्््व््््व््व््््््््व्््व््््व््व््््व्््व््््व््व््््््््व्््व्््

  4. Abhishek kumar - July 10, 2020, 11:16 pm

    ✍👍👌

  5. Satish Pandey - July 21, 2020, 7:40 pm

    bahutkhoob

  6. Abhishek kumar - July 31, 2020, 2:39 am

    मां पर तो हर किसी की कलम चल जाती है पर पिता पर बहुत ही कम लोग लिखते हैं आपने पिता पर ले कर के पिता के नहीं है को दर्शाया है बहुत ही अच्छा प्रयास

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