पुलिस दरोगा भऊजी

सीतापुरिया अवधी
रचना = “हमरी तऊ पुलिस दरोगा भऊजी”

अउरेन की भऊजी जेलि करउती,
हमरी तऊ पुलिस, दरोगा भऊजी।

दिनु भरि स्वावईं अईसी-वईसी,
पहरा राति लगावई भऊजी।

भईया बाहेर तानाशाह बनति हँई,
उँगरिन नाचु नचावई भऊजी।

सीधी-साधी जेलि करउती,
हमरी तऊ पुलिस, दरोगा भऊजी।

कबहूँ हंसावई कबहूँ रोवावँई,
कठपुतली तना नचावँई भऊजी।

सास क त्वारँईं, नंद कच्वाटँई,
सब पर धाक जमावँई भऊजी।


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10 Comments

  1. Abhishek kumar - July 11, 2020, 3:04 pm

    अपनी बोली की बात ही कुछ और है।
    एकदम सही कविता।
    अपनी भाभी को भेज दो।

  2. Abhishek kumar - July 11, 2020, 3:06 pm

    अपनी क्षेत्रीय बोली का उत्थान होना चाहिए।
    रमई काका याद आ गए।👍👍

  3. Satish Pandey - July 11, 2020, 5:19 pm

    सुन्दर शब्द

  4. Satish Pandey - July 11, 2020, 5:19 pm

    मधुर शब्दावली

  5. Anita Mishra - July 11, 2020, 7:30 pm

    सुन्दर शब्दावली

  6. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - July 11, 2020, 9:13 pm

    Nice

  7. Anita Sharma - July 12, 2020, 12:53 pm

    Nice

  8. Rishi Kumar - August 27, 2020, 9:22 pm

    बहुत खूबसूरत लाजवाब

  9. प्रतिमा चौधरी - September 26, 2020, 12:58 pm

    बहुत अच्छी

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