बरसात के आंनद और परेशानियां

सावन की कमी पूरी हो गई,
भादों में वर्षा की झड़ी हो गई।
बदरा गरज गरज कर बरस रहे ,
निर्मल झरने कल कल कर बह रहे।

बिजली चम चम कर चमक रही,
मयूरी छम छम कर नाच रही।
ठंडी ठंडी हवा सन सना रही,
प्रकृति में चारो और हरियाली छा रही।

एक तरफ मन में खुशियां आ रही,
दूसरी ओर नदियां तांडव दिखा रही।
मंदिर मकान सबकुछ डूब गए,
अपनों तक जाने वाले रास्ते टूट गए।

भ्रष्टाचारी पुल पहली बारिश सह ना सके,
नदियों की धारा संग मिलकर चल बसे।
चारो और जलजला आ रहा है,
फसलों को अपने में समा रहा है।

सैलाब में भी सेल्फी भा रही ,
जोखिम लेकर गाडियां भी जा रही,
सैनिक जिंदगी बचाने में जी जान लगा रहे,
मगर कुछ तो जान करके मरने जा रहे।


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12 Comments

  1. Priya Choudhary - August 31, 2020, 2:09 pm

    समाज को प्रेरित करती हुई प्रकृति का मोहक और कठोर रूप दोनों को एक साथ दर्शाती हुई सुंदर कविता👏👏👏

  2. Geeta kumari - August 31, 2020, 2:36 pm

    एक तरह वर्षा के सुहाने मौसम का सुंदर चित्रण ,और दूसरी ओर बारिश के कहर का यथार्थ चित्रण, वाह। इन दोनों रूपों के समागम से परिपूर्ण अति सुंदर रचना।👏👏

  3. Satish Pandey - August 31, 2020, 2:58 pm

    बहुत खूब

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - August 31, 2020, 3:23 pm

    Nice

  5. Prayag Dharmani - August 31, 2020, 3:59 pm

    Nice Poetry

  6. Geeta kumari - August 31, 2020, 5:24 pm

    तरफ

  7. Pragya Shukla - August 31, 2020, 7:27 pm

    सुन्दर

  8. Suman Kumari - August 31, 2020, 8:22 pm

    सुन्दर अभिव्यक्ति

  9. मोहन सिंह मानुष - August 31, 2020, 10:08 pm

    बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

  10. Rishi Kumar - September 1, 2020, 6:03 am

    Nice👏

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