“बुरा लगता है”

ღღ__तेरे लब पे सिवा मेरे, कोई नाम आये तो बुरा लगता है;
इक वही मौसम, जब हर शाम, आये तो बुरा लगता है!
.
जागते रहने की तो हमको, आदत हो गयी मोहब्बत में;
नींद अब किसी रोज़, सरे-शाम आये तो बुरा लगता है!
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गर इन तन्हाईयों में गुमनाम ही, मर जाऊं तो बेहतर है;
अब किसी महफ़िल में, मेरा नाम आये तो बुरा लगता है!
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ज़र्द पड़ चुके हैं सारे, वो टूटते पत्ते, बेजुबाँ मोहब्बत के;
अब इश्क़ के नाम से, कोई पयाम आये तो बुरा लगता है!
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ज़िन्दा हैं जब तक “अक्स”, उन लबों के बे-हिसाब पैमाने;
मेरे इन होठों पे कोई और, जाम आये तो बुरा लगता है!!…
.‪
#‎अक्स‬


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5 Comments

  1. Mikesh Tiwari - June 19, 2016, 3:21 pm

    nice line

  2. Udit jindal - June 19, 2016, 11:07 pm

    Bahut sundar

  3. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 9, 2019, 7:43 pm

    वाह बहुत सुंदर

  4. मोहन सिंह मानुष - August 22, 2020, 11:00 am

    बहुत ही उम्दा

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