मन करता है…..

मन करता है…
कि जी लूं कभी अपने हिस्से का जीवन
कुछ न सोचूं न ही कुछ समझूँ।

बन यायावर …
देखूँ सब कुछ चहुँ दिशाओं मे
कुछ न माँगू न ही कुछ जानूं।

मन करता है…
कि बन फक्कड आवारा घूमू
कुछ न खाऊँ न ही कुछ पीयूं।

मन करता है…
बस………. मन करता है

Comments

8 responses to “मन करता है…..”

  1. Shyam Kunvar Bharti

    behad bhaauk

  2. बहुत ही उम्दा रचना

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