जब भी देखता हूँ मैं
इस रोटी के खुरचन को
तो माँ आ जाती है यादों में।
तवे पे रोटियाँ बनाती जब
जला -जला के रोटियाँ की
सौंधी सुगन्ध फैल जाती वातों में।।
तोड़ -तोड़ के खुरचन सारे
करती साफ रोटियों को।
चुपड़-चुपड़ घी से मैया
हमें खिलाती रोटियों को।
जब पूछता कारण इसका
मुस्कुरा के रह जाती माता।
आ परदेश में अपने हाथों
बना के रोटी जब भी खाता।।
मैया याद में आती है और
खुद हीं समझ जाता हूँ मैं।
सेहतमंद यही रोटी है
सबको अब बतलाता हूँ मैं।।
माँ और रोटी का खुरचन
Comments
5 responses to “माँ और रोटी का खुरचन”
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Good
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Good
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Nice
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वाह
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Nyc
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