मार गई मुझे

तेरी अदाएँ, तेरी नज़ाकत मार गई मुझे।
तेरी शोख़ियाँ, तेरी शरारत मार गई मुझे।

बेशक मोहब्बत है, पर डरता हूँ इज़हार से,
मेरी खामोशी, मेरी शराफ़त मार गई मुझे।

मैं करना चाहता था, अकेले दिल की बातें,
पर तेरे दोस्तों की, जमाअत मार गई मुझे।

तेरी नज़रें बहुत कुछ कहना चाही मगर,
मेरी नादानी, मेरी हिमाक़त मार गई मुझे।

दिल चाहता है तेरी धड़कने महसूस करना,
गले में तेरी बाहों की हिरासत मार गई मुझे।

देवेश साखरे ‘देव’

जमाअत- मंडली, हिमाक़त- बेवकूफी


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12 Comments

  1. Abhishek kumar - December 15, 2019, 10:34 pm

    Good

  2. Amod Kumar Ray - December 16, 2019, 1:50 am

    Good

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 16, 2019, 6:01 am

    Nice

  4. Pragya Shukla - December 16, 2019, 10:40 am

    Good

  5. Poonam singh - December 16, 2019, 2:43 pm

    Nice

  6. Satish Pandey - July 13, 2020, 10:27 am

    वाह

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