मुक्तक

बरसात हो रही है
मन झूम रहा है ऐसे
ऊँचे ऊँचे पेड़ों की
पंत्तियां
झूम रही हैं जैसे,
रिम झिम छम छम
छम छम छम छम

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Responses

  1. आपके काव्य में ध्वनिसूचक शब्दों की पहल से कविता का नाद सौंदर्य में इज़ाफ़ा हुआ है, आपकी कविता पढ कर निराला जी की कविता ‘झर झर झर निर्झर गिरि सर में’ याद आ गई

  2. बहुत खूब, कम कम लिखो, लेकिन जब लिखो, अति सुंदर लिखो, यही होना चाहिए

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