मुस्कुराओ अन्यथा हम रुष्ठ हैं

मारकर फूल मत समझो
कि हम संतुष्ट हैं।
मुस्कुराओ अन्यथा हम रुष्ठ हैं।
क्या करें मासूमियत से आपकी,
ये चिढ़ाते नैन क्या कम दुष्ट हैं।

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Responses

  1. “नैन क्या कम दुष्ट हैं” वाह सर वाह खूब अच्छा
    नैन हीं है जो नाम से बदनाम करते हैं,
    मत गिरो किसी की नजरों में
    वरना घरवाले भी
    सूरज की रोशनी में
    पहचानने से इनकार करते हैं

    1. ऋषि जी, आपने इतनी सुंदर समीक्षा की है, आपको बहुत बहुत धन्यवाद, आपका स्नेह यूँ ही बना रहे।

  2. ध्वन्यात्मक साम्य का प्रयोग काबिले तारीफ
    है और क्या कहूँ…

    1. बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी, आपकी सुन्दर टिप्पणी और पारखी समीक्षा से मन हर्षित है।

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