मेरा हृदय

बीती रात जब मैं यादों
के आगोश में जाने लगी
कल्पना के स्वर्ग में
तुमको जरा पाने लगी

तभी मेरा ह्रदय
वेदना की आग में तपने लगा
और यों कहने लगा
‘तुम भी क्या अनोखी चीज़ हो’
ना समझ पा रहा हूं मैं

खुद उलझाने अपनी बना
फँसती हो तुम, रोती हो तुम
और फिर बेचैन हो
रात भर जगती हो तुम

तुमसे मेरा रिश्ता कितना
पुराना है जानती हो?
मैंने तुमको कितनी दफा
यूं ही पल-पल मरते देखा है
और लाखों बार फिर
खुद में ही हंसते देखा है

ना जाने कितनी बार
देखा रतजगे करते हुए
कौमुदी में बैठ सपनों
को यूंही सँजोते हुए


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22 Comments

  1. Abhishek kumar - December 19, 2019, 11:07 am

    सुन्दर स्वाभविक रचना

  2. Kanchan Dwivedi - December 19, 2019, 5:04 pm

    सुन्दर रचना

  3. Pragya Shukla - December 19, 2019, 5:23 pm

    थैंक यू

  4. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 19, 2019, 7:42 pm

    Best

  5. Anil Mishra Prahari - December 19, 2019, 8:30 pm

    बहुत सुन्दर।

  6. Amod Kumar Ray - December 19, 2019, 9:14 pm

    दिल से रचना।

  7. Abhishek kumar - December 19, 2019, 9:52 pm

    Nice lines

  8. King radhe King - December 21, 2019, 12:41 pm

    दिल से दिल तक

  9. Reema Raj - December 21, 2019, 12:47 pm

    भाव पूर्ण रचना

  10. Reema Raj - December 21, 2019, 12:57 pm

    सुन्दर

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