मैं हिन्दी

हिन्द भाषाओं का सागर है l

मैं हिन्दी उसमें से एक हूँ , उद्भव मेरी संस्कृत से है l

हिन्द की सारी भाषाओं में भाईचारा था l

अंग्रेजी ने हमें स्वार्थ के लिए बांटा था l

मेरे संस्कार ने आजादी की चिंगारी डाला था l

फिर क्या था मैं इतिहास रचने निकल पड़ा था l

हिंद की कड़ी बनी, शंखनाद किया आजादी का l

मैंने जुल्मों सितम सहा, पर अडिग रहा l

आजादी का मंत्र हिंद के जनमानस में फूंका l

ऐसे मैंने आजादी का इतिहास रचा l

राष्ट्रभाषा का मुझे सम्मान मिला l

मैंने ही संविधान रचा,फिर भी कुछ ने मुझे ठुकराया l

अंग्रेजी ने अहंकार रूपी बीज जो बोया था l

मैंने हर भाषा को अपनाया, समानता का अधिकार दिया l

मैंने ही भेदभाव की जंजीरे तोड़ा, पर मुझे ही धर्म से तोला गया l

वर्षों से आस लगाए बैठा कभी तो मुझे अपनाओगे l

सारे बैर भुला राष्ट्रहित के लिए गले लगाओगे l

Rajiv Mahali


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16 Comments

  1. Master sahab - September 14, 2020, 2:41 pm

    बहुत रोचक तथ्य उजागर किए हैं आपने

  2. Suman Kumari - September 14, 2020, 2:49 pm

    सुन्दर अभिव्यक्ति

  3. Geeta kumari - September 14, 2020, 2:56 pm

    राष्ट्र हित का संदेश देती हुई बहुत सुंदर रचना।

  4. Pragya Shukla - September 14, 2020, 3:56 pm

    Beutiful poem

  5. Satish Pandey - September 14, 2020, 4:37 pm

    हिन्दी दिवस पर खूबसूरत रचना, हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

  6. vivek singhal - September 14, 2020, 5:22 pm

    अति सुंदर

  7. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 14, 2020, 8:38 pm

    सुंदर

  8. प्रतिमा चौधरी - September 14, 2020, 8:43 pm

    बहुत सुंदर पंक्तियां

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