रफ्ता रफ्ता

रफ्ता-रफ्ता चलते जा रहे हैं
मंज़िल की ओर…..
खुशी तो बहुत है
फकत इतना गम है
हम भी तेरे जैसे
होते जा रहे हैं…

Published in शेर-ओ-शायरी

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