“रिश्तों की पौध”

तुम्हारी हर एक बात सही है….
वक्त का पता तो चलता ही नहीं है
अपनों के साथ,
पर अपनों का पता चल जाता है वक्त के साथ।
मगर ए हमदम!
अपनों के प्रति ऐसी संवेदनाएं रखना,
अच्छी बात नहीं होती।
अपनों को अपना बनाने के लिए,
प्रेम की रसधार से सीचना पड़ता है।
“रिश्तों की पौध”को।।


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17 Comments

  1. Abhishek kumar - June 2, 2020, 9:23 pm

    सुंदर बात कही है

  2. Abhishek kumar - June 2, 2020, 9:29 pm

    हार्दिक बधाई हो आपको सर्वश्रेष्ठ कवयित्री बनने पर

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - June 2, 2020, 9:41 pm

    अतिसुंदर

  4. Rajiv Mahali - June 3, 2020, 11:18 am

    बधाई हो

  5. Master sahab - June 3, 2020, 2:35 pm

    👌👌👌👌🙏🙏🙏

  6. Priya Choudhary - June 4, 2020, 4:52 pm

    Good

  7. Panna - June 6, 2020, 12:45 pm

    बहुत खूब

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