लफ्जों की पोटली

लफ्जों की पोटली ,
बांध लो ना तुम ,
क्या कहते हैं ,वो जरा
सुन लो ना तुम,
तब मांपना और तोलना ,
उनकी बातों को ,
फिर वह पोटली खोल देना तुम,
तर्क वितर्क के भीतर नहीं फंसोगे ,
इससे पहले ना बोलना तुम ।
रखते हो राय अगर अलग अपनी,
फिर ना झिझक ना तुम
अगर है सही विचार तुम्हारे,
तो उसे समझाना ,बतलाना जरूर ।
कहीं गर्म ना हो जाए बातों से मसला
लफ्जों की पोटली,
फिर से बांध लेना तुम।

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Responses

  1. बहुत ही प्रेरणादायक, अगर हम शब्दों को सोच समझकर वार्तालाप करें तो कभी भी हंसी या ईर्ष्या के पात्र नहीं बन सकते
    बहुत ही बेहतरीन रचना

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