लम्बे लम्बे हो गए दिन

लम्बे- लम्बे हो गए दिन ,
रात समुन्दर जैसी हैं ,

तेरे बिन; इश्क के मंजर में,
हालत बंजर जैसी हैं ।

किया है तूमने जादू हम पर,
तेरी आंखों में मदहोशी है,
कैसे ना बहक जाए हम,
सुरत जो अप्सरा जैसी हैं ।

लम्बे लम्बे हो गए दिन,
रात समुन्दर जैसी हैं……

—-मोहन सिंह मानुष

Comments

8 responses to “लम्बे लम्बे हो गए दिन”

  1. उपमा अलंकार का सुंदर प्रयोग कवि की कल्पना उच्चतम है भाव पक्ष तथा कला पक्ष दोनों बहुत ही सुंदर है

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      धन्यवाद जी

  2. आपकी यह कविता मैं 5 बार पढ़ चुका हूं पता नहीं क्यों?
    बहुत दिल छू रही हैं।

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      इतना सम्मान देने के लिए बहुत-बहुत आभार सर

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      धन्यवाद सर

  3. Pratima chaudhary

    Very nice lines

Leave a Reply

New Report

Close