वंदेमातरम

मां तुझ से है मेरी यही इल्तज़ा।
तेरी खिदमत में निकले मेरी जां।

तेरे कदमों में दुश्मनों का सर होगा,
गुस्ताख़ी की उनको देंगे ऐसी सजा।

गर उठा कर देखेगा नजर इधर,
रूह तक कांपेगी देख उनकी कज़ा।

कभी बाज नहीं आते ये बेगैरत,
हर बार शिकस्त का चखकर मज़ा।

दुश्मन थर – थर कांपेगा डर से,
वंदे मातरम गूंजे जब सारी फिज़ा।

देवेश साखरे ‘देव’


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13 Comments

  1. Priya Choudhary - June 30, 2020, 7:42 am

    🇮🇳🇮🇳 बहुत सुंदर🇮🇳🇮🇳

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - June 30, 2020, 10:47 am

    बेहतरीन भाव
    भारत माता की जय

  3. Pragya Shukla - June 30, 2020, 3:08 pm

    जय हो

  4. Yuvraj Mudit - July 1, 2020, 2:49 pm

    nice

  5. Antima Goyal - July 7, 2020, 9:47 pm

    nice

  6. Sulekha yadav - July 7, 2020, 10:07 pm

    nice

  7. Abhishek kumar - July 10, 2020, 11:00 pm

    👌👌

  8. Satish Pandey - July 11, 2020, 1:24 pm

    वाह जी वाह

  9. Anita Sharma - July 12, 2020, 11:21 am

    Nice

  10. Abhishek kumar - July 31, 2020, 2:16 am

    बहुत ही उम्दा रचना

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