होली में फूल खिला दे
हँसी के, होली में फूल खिला दे।
प्यारे-प्यारे रंग-बिरंगे
फूल ही फूल खिला दे। हँसी के—
ढंग-बेढंदी हुई जिंदगानी,
होली में ढंग दिला दे।
हँसी के होली में फूल खिला दे।
फैली निराशा जिनके पथ में
आस की ज्योति जगा दे।
हँसी के होली में फूल खिला दे।
हारे-थके जो व्यथित पड़े हैं
उनमें जोश जगा दे।
हँसी के, होली में फूल खिला दे।
बिछुड़ गए हैं जिनके प्रियतम
होली में आज मिला दे।
हँसी के, होली में फूल खिला दे।
हँसी के फूल खिला दे
Comments
7 responses to “हँसी के फूल खिला दे”
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बहुत ही स्नेहिल रचना
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बहुत बढ़िया रचना
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प्यारे-प्यारे रंग-बिरंगे
फूल ही फूल खिला दे। हँसी के—
ढंग-बेढंदी हुई जिंदगानी,
होली में ढंग दिला दे।
हँसी के होली में फूल खिला दे।
__________ होली के अवसर पर कवि सतीश जी द्वारा रचित, बहुत ही सुंदर और स्नेहिल रचना सुंदर शिल्प और सुंदर प्रवाह लिए हुए अति उत्तम लेखन -

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अतिसुंदर भाव
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Jay ram jee ki
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होली में फूल खिला दे
हँसी के, होली में फूल खिला दे।
प्यारे-प्यारे रंग-बिरंगे
फूल ही फूल खिला दे। हँसी के—
ढंग-बेढंदी हुई जिंदगानी,
होली में ढंग दिला दे।प्रेम से परिपूर्ण पंक्तियां, सरल, सरस भाषा में
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