हमका देखि बोलीं भऊजी !!

सीतापुरिया अवधी बोली:-

हमका देखि बोलीं भऊजी
काहे नाई सोउती हऊ तुम ?
राति-राति भरि किटिपिटि-
किटिपिटि फोन म का
लिखती हउ तुम?
हम बोलेन ओ भाउजी !
थोरी-बारी कविता लिखा
करिति हन हम,
घर बाईठे ऑनलाइन
कपड़ा द्यखा करिति हन हम।
वइ बोलीं हमकउ
सिखाई देऊ हमहूं
कपड़ा देखिबि,
जऊनी साड़ी नीकी लगिहँई
तुमरे दद्दा तेने कहिके मंगाई लीबि।
हम कहेन ठीक भऊजी
अब हमका जाइ देउ,
कुछु टूटी-फाटी
कवितन का हमका लिखइ देउ ।


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8 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - May 19, 2020, 6:40 am

    सुन्दर भाव

  2. Abhishek kumar - May 19, 2020, 3:15 pm

    बहुत सुन्दर रचना 👏👏

  3. प्रतिमा चौधरी - September 26, 2020, 3:36 pm

    क्या बात है!👏👏

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