हमें ये नया साल नहीं स्वीकार

हमें ये नया साल नहीं स्वीकार
जिसमें वही हालात, वही हार
देश में मचा हुआ है हाहाकार
कविता हुई है अब लाचार

ठिठुर रहा गणतंत्र है
जनता कुहरे में कहीं गुम है
घर -घर है अभी तक गरीबी
जन कर रहा गुहार
हमें ये नया साल नहीं स्वीकार


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

10 Comments

  1. देवेश साखरे 'देव' - December 31, 2019, 5:48 pm

    सुन्दर

  2. Kanchan Dwivedi - December 31, 2019, 7:41 pm

    अच्छी प्रस्तुति

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 31, 2019, 8:58 pm

    Nice

  4. Abhishek kumar - December 31, 2019, 9:24 pm

    Good

  5. Pragya Shukla - December 31, 2019, 9:48 pm

    Nice

  6. Abhishek kumar - January 1, 2020, 10:02 am

    Good one

  7. Amod Kumar Ray - January 1, 2020, 1:46 pm

    वाह।

  8. Pragya Shukla - January 1, 2020, 2:16 pm

    Nice

  9. Pragya Shukla - January 1, 2020, 9:52 pm

    Awesome

  10. NIMISHA SINGHAL - January 3, 2020, 9:55 am

    👏👏

Leave a Reply