हम परिंदे हैं…

हम बसाएंगे
अपना घरौंदा कहीं…
हम परिंदे हैं
एक जगह रुकते नहीं…
जहाँ मिलती हैं
खुशियाँ जाते हैं वहाँ
हम गमों में
घरौंदा बनाते नहीं…
चुनते हैं तिनके
घोसले के लिए..
जिंदगी भर कहीं
हम बसते नहीं…
पंख हैं, हौसला है
रुकेंगे नहीं..
भरेंगे जाकर उड़ानें कहीं…
हम परिंदे हैं
एक जगह रुकते नहीं…


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10 Comments

  1. Rajiv Mahali - June 27, 2020, 7:55 am

    Wa

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - June 27, 2020, 7:57 am

    वाह

  3. महेश गुप्ता जौनपुरी - June 27, 2020, 7:58 am

    वाह बहुत सुंदर रचना

  4. Yuvraj Mudit - June 27, 2020, 11:17 am

    सुंदर

  5. Ritika bansal - June 29, 2020, 11:40 am

    achi kavita

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