हर बार टूट जाते है अहसास

बेहिसाब अहसासों को हम सिमटे कैसे
कहां हो पाता है मुकम्मल मकां-ए-नज्म मिरा
हर बार टूट जाते है अहसास,
ख्वाबों के जैसे


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Panna.....Ek Khayal...Pathraya Sa!

9 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - May 18, 2020, 9:46 pm

    Nice

  2. Pragya Shukla - May 18, 2020, 9:50 pm

    Good 👏👏

  3. महेश गुप्ता जौनपुरी - May 18, 2020, 10:32 pm

    वाह बहुत सुंदर रचना

  4. Antariksha Saha - May 18, 2020, 10:48 pm

    Wah panna

  5. Abhishek kumar - May 19, 2020, 12:10 am

    Good

  6. महेश गुप्ता जौनपुरी - May 19, 2020, 6:59 pm

    वाह बहुत सुंदर

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