“ख़ामोशी” #2Liner-106

ღღ__कह तो सब दूँ “साहब”, पर कभी ख़ामोशी भी पढ़ा करो;
.
वैसे भी मोहब्बत में, हर बात, कहने की नहीं होती!!……‪#‎अक्स‬

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3 Comments

  1. Panna - April 19, 2016, 12:04 pm

    umda!

  2. Pragya Shukla - April 18, 2021, 7:19 pm

    अति सुन्दर रचना

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