“ख़ुदा-ख़ुदा करके”

ღღ_तजुर्बे सब हुए मुझको, महज़ उससे वफ़ा करके;
दुआ जीने की दी उसने, मुझे खुद से जुदा करके!
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मैं कहना चाहता तो हूँ, यकीं उसको अगर हो तो;
ग़ैर का हो नहीं सकता, उससे अहद-ए-वफ़ा करके!
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मैं मुजरिम हूँ अगर तेरा, सजा जो चाहता हो दे;
न ख़ुद से दूर रख तू यूँ, मर जाऊंगा ज़रा-ज़रा करके!
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शिकायत है अगर मुझसे, तो बताते क्यूँ नहीं आख़िर;
सुकून थोडा तो मिल जाता, हाल-ए-दिल बयां करके!
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नज़र किसकी लगी है “अक्स”, ख़ुदाया प्यार को अपने;
कौन है अपना, जो मुझको लूटता है ख़ुदा-ख़ुदा करके!!…..‪#‎अक्स‬
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