नृत्य कला तो ईश्वर की कृपा से मिला हुआ वरदान है,
पर नृत्य को “नाच” कहकर संबोधित करना यह नृत्य कला का अपमान है।
नृत्य कला युगो-युगो से चली आई,
क्या इसका तुमको भान है?
चाहे कान्हा की हो नगरी ,या राम की हो अवध नगरी,
होता कोई उत्सव तो,नृत्य कर आनंदित होती जनता सगरी,
पूरे घट-वासी संग पशु-पक्षी भी झूमे,
करते सुंदर स्तुति नृत्यगान है।
क्यों हम भूल गए अपनी नृत्य कला,
क्यों हम इससे अनजान हैं,
आओ मनाले आज अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस,
यह संपूर्ण विश्व की पहचान है।।
–✍️–एकता—–
अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस (भाग१)
Comments
5 responses to “अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस (भाग१)”
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नृत्य कला को ‘नाच’ कहकर संबोधित करना यह नृत्य कला का अपमान है।।
अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस पर दिल को छू जाने वाली पंक्तियां।। -

Nice
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अतिसुंदर भाव
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सुंदर भाव
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समीक्षा हेतु आपका धन्यवाद
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