10 Comments

  1. शिकवा है मुझे उससे, जिसने लिखी हैं अधूरी कहानियां,
    क्यों कराया था मिलन, गर परवान- ए- मोहब्बत की औकात ना थी।
    AK

    1. पंडित जी ।आपकी समीक्षा मुझे बहुत ही अच्छी लगी। इसलिए मैं आपको बहुत बहुत धन्यवाद देता हूँ।

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