सतरंगी यादों के संग
देखे रंग बिरंगे स्वप्न कयी
पावस के छाये में दिखा जो दिनकर
फिर से पली उम्मीद नयी
सतरंगी यादों के संग
Comments
5 responses to “सतरंगी यादों के संग”
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बहुत सुंदर पंक्तियां
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वाह सुमन जी ।सतरंगी यादों में आशा की किरण, बहुत ही सुन्दर भाव में आपने रचना रचीं है।
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बहुत खूब
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बहुत खूब अतिसुन्दर
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Very nice
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