तुम्हारे होंठों की सरगम बिन
मेरे गीत अधूरे हैं।
मेरी नजरों से रहते दूर तुम
मेरे प्रीत अधूरे हैं।
तुम्हें खोकर सारी दुनिया जीतूँ
मेरे जीत अधूरे हैं।
‘विनयचंद ‘ वफा के बिन
मनमीत अधूरे हैं।।
अधूरे हैं
Comments
15 responses to “अधूरे हैं”
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Nice
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Thanks
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बहुत खूब
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धन्यवाद
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nice one
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धन्यवाद
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Good
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धन्यवाद
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Welcome
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Nice
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धन्यवाद
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सुन्दर
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सुन्दर रचना
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Best
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Shi kaha
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