अपनी अदा यों न दिखाएँ

जब जब मैं
कलम उठाना चाहा
हसीन शेर लिखने के लिए
उसने कहा लगता है
मैं हो जाउंगी बदनाम
शायद तुम्हारे लिए
मैं चाह के भी
उसके लिए शेर नहीं लिख पाया
अब कोई उनसे कह दो
अपनी अदा यों न दिखाए
इन बहारों में खुदा के लिए।

Comments

7 responses to “अपनी अदा यों न दिखाएँ”

  1. Geeta kumari

    वाह,बहुत ख़ूब

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    सुन्दर प्रस्तुति

  3. उत्तम रचना

  4. सुंदर रचना

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