“अपनेपन का एहसास”

क्यों अपनों के बीच
अपनेपन का एहसास नहीं होता
क्यों वो हर एहसास खास नहीं होता
कुछ तो कमी होगी मेरे ही अन्दर,
जो कोई अपना होकर भी साथ नहीं देता….

Comments

5 responses to ““अपनेपन का एहसास””

    1. जी धन्यवाद

  1. यूं लग रहा है जैसे
    दर्द का एक जाम पी लिया
    आपकी कविता ने मन को भाव विभोर कर दिया..
    उच्चकोटि का शिल्प और संवेदना की प्रबलता है आपकी लेखनी में||

    1. बहुत खूब लिखा है..
      धन्यवाद सराहना हेतु

  2. vikash kumar

    कहने को तो कहती हैं ये दुनिया
    साथ देंगे हम तुम्हारा
    जब काम आती हैं साथ देंगे को
    तो क्यूं साथ छोड़ देती ये ज़माना

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