नए वर्ष की नई भोर है
स्वर्णिम-उजियारा चहुं ओर है
चेहरे चमके बगिया महकी
ओस सुबह की फिर से चमकी
उपवन में फिर फूल खिलेंगे
बिछड़े दिल भी आज मिलेंगे
सुंदर है कुदरत की चित्रकारी
क्या जंगल क्या पर्वतों की बर्फबारी
सागर की लहरें भी प्यारी
करती मीठा शोर है
स्वर्णिम उजियारा चहुं ओर है
है उल्लासित जग सारा
दूर होगा सब अंधियारा
खुशियों का लाएगा पिटारा
अभिनंदन नव वर्ष तुम्हारा
______✍️गीता
*अभिनंदन नव वर्ष तुम्हारा*
Comments
15 responses to “*अभिनंदन नव वर्ष तुम्हारा*”
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आप सभी को नव वर्ष की बहुत-बहुत शुभकामनाएं
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बहुत खूब
नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें-
बहुत-बहुत धन्यवाद अनु जी
आपको भी नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं
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नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ व बधाई
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नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं संदीप जी
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वाह बहुत सुंदर लिखा है आपने
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बहुत-बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं
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अतिसुंदर भाव
बहुत बहुत मुबारकबाद नये, साल की-
बहुत-बहुत धन्यवाद भाई जी
आपको भी नए वर्ष की बहुत-बहुत शुभकामनाएं🙏
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एक एक शब्द स्वर्ण है
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इतनी सुन्दर समीक्षा…. ह्रदय तल की गहराइयों से धन्यवाद प्रज्ञा
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बहुत-बहुत धन्यवाद विवेक भाई
आपको भी नव वर्ष की बहुत-बहुत बधाई
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है उल्लासित जग सारा
दूर होगा सब अंधियारा
खुशियों का लाएगा पिटारा
अभिनंदन नव वर्ष तुम्हारा”
—– बहुत सुन्दर रचना, उम्दा शिल्प, बेहतरीन काव्य सौष्ठव है गीता जी, लेखनी में निरंतर प्रखरता। वाह-
बहुत-बहुत धन्यवाद
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