जीवन में उत्साह हो
मन नाचे बनकर मोर
हे युवा ! तू परिश्रम कर
सफलता मिलेगी घनघोर
अभी तो तूने जीवन की
बस एक दोपहरी देखी है
अभी तो तूने सावन की
बस पहली बारिश देखी है
अभी तो तुझको अपनी हथेली पर
भाग्य का दिनकर उगाना है
भावों का मंथन करके तुझको
साहित्य का सागर पाना है
अभी कहाँ तू थककर बैठ गया
तुझे क्षितिज तक जाना है….
अभी कहाँ तू थककर बैठ गया ! तुझे क्षितिज तक जाना है…
Comments
11 responses to “अभी कहाँ तू थककर बैठ गया ! तुझे क्षितिज तक जाना है…”
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अभी तो तूने जीवन की
बस एक दोपहरी देखी है
अभी तो तूने सावन की
बस पहली बारिश देखी है…
वाह क्या खूब लिखा है
सुंदर लयात्मक तथा संगीतमय रचना
युवा को अपने जीवन में आगे बढ़ने को तथा खूब प्रेरित करती हुई रचना-

Thanks
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परिश्रम करने को प्रेरित करती रचना
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Thank you
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बहुत सुंदर
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धन्यवाद
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हे युवा ! तू परिश्रम कर
सफलता मिलेगी घनघोर
_______ परेशान करने का सुंदर संदेश देती हुई कवि प्रज्ञा जी की बहुत सुंदर रचना -
हे युवा ! तू परिश्रम कर
सफलता मिलेगी घनघोर
_______ परिश्रम करने का सुंदर संदेश देती हुई कवि प्रज्ञा जी की बहुत सुंदर रचना-

Thanks
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Speechless poem
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Tq
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