गुनगुनाते गीत मेरे
जीवन से जुड़े लफ़्ज़ों में
बुजुर्गों की दुआओं में,
प्रेम की निगाहों में ।
ममता के अश्कों में,
उमड़ते भावों में
भर रहे घावों में
टूटती चाहों में
दर्द में आहों में।
निकलते बोल मेरे
जीवन की मधुर बातों में
नेह भरे नातों में
मीठी मुलाकातों में
बीत गई यादों में,
गुनगुनाते रहे
गीत मेरे होंठो में
बिक रहे नोटों
बड़ों में छोटों में
दिल में लगी चोटों में,
निकलते बोल मेरे
ईश तुम सुन लेना
और सत पथ देना।
जीवन की मधुर बातों में
Comments
7 responses to “जीवन की मधुर बातों में”
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बहुत सुंदर लेखनी। वाह, इस निरंतर प्रखरता बिखेरती लेखनी को सलाम
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बहुत शानदार रचना
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अति उत्तम रचना
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अतिसुंदर रचना
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गुनगुनाते गीत मेरे
जीवन से जुड़े लफ़्ज़ों में
बुजुर्गों की दुआओं में,
प्रेम की निगाहों में ।
………….. कवि सतीश जी की लेखनी से निकली हुई बहुत सुंदर पंक्तियां, एक श्रेष्ठ कवि के हृदय से निकले हुए सच्चे उद्गार, वाह.. शानदार लेखन -

कवि सतीश पाण्डेय जी की एकदम सच्ची प्रस्तुति
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बहुत खूब
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