अहिल्या पत्थर बनायी जाती है

अहिल्या पत्थर बनायी जाती है
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करनी किसी की भी हो,सतायी नारी जाती है ।
हवस हो इन्द्र की,अहिल्या पत्थर बनायी जाती है ।।
युग युगांतर से यही,बस होता आया है
अहम तुष्टि हो नर की, कलंक नारी पे छाया है
रूप यौवन,सौम्यता नारी ने ईश्वर से पाया है
हरहाल में दुश्मन,बनी उसकी ही काया है
चिथङे उङते सम्मान के,कलंकनी कहलायी ज़ाती है ।
हवस हो इन्द्र की–
मान गया,सम्मान गया,अनचाहा जीवन पाया है
नारी की अस्मिता पर,कैसा संकट छाया है
अन्तर्मन को भेदती निगाहें,दरिन्दगी का कहर ढाहा है
भूलता क्यू है वो भी, किसी जननी का जाया है
बहसी बना वह ,कमी उसमें निकाली जाती है ।
हवस हो इन्द्र की,अहिल्या पत्थर बनायी जाती है ।।—–
बस फर्क इतना है तब व अब की नारी की आह में
हर एक से ठोकर खाती,अहिल्या पङी थी राह में
गौतम का कोपभाजन बन बैठी,इन्द्र की चाल में
बनी शीला उद्धार हेतु, राम के इन्तजार में
दोष किसी की नियत का,दोषी वही ठहरायी जाती है ।
हवस हो इन्द्र की,अहिल्या पत्थर बनायी जाती है ।।—
कल नहीं थी,आज भी कहाँ,नारी सुरक्षित रहती है
चौक-चौराहे पे,अनामिका की आवरू,लुटती रहती है
दुष्कर्म से पीड़ित,नहीं तो,एसिड से जलती रहती है
कोख में,तो कभी,दहेज की वेदी पे चढ़ती रहती है
अत्याचारी है कोई,अंगुली नारी पे उठायी जाती है ।–

Comments

20 responses to “अहिल्या पत्थर बनायी जाती है”

  1. Praduman Amit

    नारी युग युगांतर से पुरुषों के हाथों छलती आई। इतिहास आज भी गवाह है। रचना अच्छी है।

  2. Suman Kumari

    धन्यवाद धन्यवाद

  3. बहुत अच्छी कविता

    1. Suman Kumari

      धन्यवाद ।
      आपको बधाई ।

      1. जी धन्यवाद

  4. नारी की स्थिति के बारे में प्रकाश डालती हुई,हृदय स्पर्शी रचना।

    1. Suman Kumari

      धन्यवाद धन्यवाद

    2. Suman Kumari

      गीताजी मैं तहे दिल से शुक्रिया अदा करती हूँ ।
      कृपया आगे भी मार्गदर्शन करती रहे ।

  5. This comment is currently unavailable

    1. Suman Kumari

      धन्यवाद धन्यवाद

  6. पुरुष को ईश्वर ने इसलिए ताकतवर बनाया कि वो नारी की रक्षा कर सके, किंतु जब रक्षक है भक्षक बं बैठे तो सज़ा उसे मिलनी चाहिए ,ना कि नारी को ।….बहुत सुंदर भाव👏

  7. “जब रक्षक ही भक्षक बन बैठे”
    *Correction of typing mistake*

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. Suman Kumari

      धन्यवाद धन्यवाद

  8. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    करनी किसी की भी हो पर नारी हीं सतायी जाती है।
    कहर ढाया
    शिला
    बहुत खूब। वाह वाह।

    1. Suman Kumari

      धन्यवाद धन्यवाद

  9. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत ही बेहतरीन एवं सराहनीय प्रस्तुति
    नारी का प्राचीन समय से अब तक ,जो शोषण हो रहा है
    उसका यथार्थपरक चित्रण
    वास्तव में यह एक चिंता का विषय है, वर्तमान में इस शोषण को नारी ही खत्म कर सकती है , जागरूकता से।

    1. Suman Kumari

      धन्यवाद धन्यवाद

  10. जितनी तारीफ करें उतनी कम
    बहुत सुंदर है

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