अज़ीज़

मैं कितना अज़ीज़ था ये इस बात से ज़ाहिर हुआ,
लगा के आग मुझे कुछ देर, कोई भी रुका नही..

Comments

10 responses to “अज़ीज़”

  1. उत्तम रचना

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    1. Prayag Dharmani

      🙏🙏

  3. वाह क्या बात है

    1. शुक्रिया आपका

    1. धन्यवाद जी

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