आँसू हुए शुमार जब..

‘समंदर समझ रहा था कि मौजें यूँ ही बनी,
आँसू हुए शुमार कुछ, तब जाके कहीं बनी..’

– प्रयाग
मौजें – लहरें
शुमार – गिनती में शामिल होना

Comments

15 responses to “आँसू हुए शुमार जब..”

  1. वाह क्या कहने

    1. बहुत शुक्रिया

  2. Geeta kumari

    वाह,बहुत ख़ूब

    1. आभार आपका

  3. सर बहुत बढिया
    पर मैं चाहता हूँ कि आप
    पूर्ण हिंदी में कविता लिखें
    उर्दू अच्छी है
    पर हिंदी सबसे अच्छी वा सुदृढ़ भाषा है

    1. Prayag Dharmani

      जी मैं दोनो में ही लिखता हूँ आप मेरी प्रोफाइल पर जाएंगे तो आपको हिंदी रचना भी मिलेगी । कभी कभी मैं पंजाबी में भी लिखता हूँ मल्टीलेंग्वल राइटिंग मेरी यू.एस.पी है बस इसीलिए थोड़ा अलग अलग शब्दकोश प्रयोग में लाता हूँ

    1. धन्यवाद आपका

    1. Prayag Dharmani

      शुक्रिया

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar

    सुन्दर प्रस्तुति

    1. बहुत शुक्रिया

  5. Satish Pandey

    वाह सर वाह

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