आजाद किसे कहें?
सब बंधे हैं बंधन में।
हर शाम पंछी,
अपना घोंसला तलाशता है।
जहां चाह होती है,
अपने आशियाने की।
वह बोलते नहीं तो क्या,
दिख जाती है उनकी ममता,
जब चुग कर खिलाती है,
दाना अपने बच्चों को।
सिखाती है उसे उड़ना,
पंख फैलाकर,
आजाद किसे कहें ,
सब बंधे हैं बंधन में।
आजाद किसे कहें!
Comments
10 responses to “आजाद किसे कहें!”
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सुन्दर भाव, सुन्दर अभिव्यक्ति
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सादर धन्यवाद
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बेहतरीन प्रस्तुति
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धन्यवाद सर
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रचना तारीफ़ ए क़ाबिल है।
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धन्यवाद सर
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sunder kavita
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धन्यवाद
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बेहतरीन लेखनी
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धन्यवाद सर
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