आजाद किसे कहें!

आजाद किसे कहें?
सब बंधे हैं बंधन में।
हर शाम पंछी,
अपना घोंसला तलाशता है।
जहां चाह होती है,
अपने आशियाने की।
वह बोलते नहीं तो क्या,
दिख जाती है उनकी ममता,
जब चुग कर खिलाती है,
दाना अपने बच्चों को।
सिखाती है उसे उड़ना,
पंख फैलाकर,
आजाद किसे कहें ,
सब बंधे हैं बंधन में।

Comments

10 responses to “आजाद किसे कहें!”

  1. सुन्दर भाव, सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. Pratima chaudhary

      सादर धन्यवाद

  2. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    बेहतरीन प्रस्तुति

    1. Pratima chaudhary

      धन्यवाद सर

  3. Praduman Amit

    रचना तारीफ़ ए क़ाबिल है।

    1. Pratima chaudhary

      धन्यवाद सर

  4. Deep

    sunder kavita

  5. बेहतरीन लेखनी

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