आज नजदीक से देखा उनको
तब से मन में बदल गया सब कुछ,
हम तो कुछ और ही सोचे थे मगर
उनमें कुछ और ही मिला।
हम तो समझे थे वे बड़े वो हैं
मगर नजदीक से देखी सूरत,
वे तो हैं नेह की खिलती मूरत
उनमें सब कुछ सरल ही मिला।
आज नजदीक से देखा उनको
Comments
18 responses to “आज नजदीक से देखा उनको”
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बहुत खूब
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Thank you
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Very nice
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Thank you ji
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बहुत सुन्दर
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बहुत बहुत धन्यवाद
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अकसर यही होता आया है
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Thanks जी
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बहुत खूबसूरत रचना है सतीश जी। कवि ने मन के भावों का अति सुंदरता से वर्णन किया है ।लेखनी की प्रखरता की जितनी तारीफ करें उतनी काम है। लेखनी को प्रणाम ।
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आपकी समीक्षा प्रेरणादायक है। भावों पर इतनी सुंदर पकड़ एक सुलझे हुए कवि की लेखनी ही कर सकती है। बहुत बहुत धन्यवाद गीता जी।
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अतिसुंदर भाव
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सादर नमस्कार, धन्यवाद
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Nice lines
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Thank you ji
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बहुत खूब
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बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी
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बहुत बढ़िया
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बहुत बहुत धन्यवाद जी
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