जय श्री सीताराम
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आज-न कल सबको सच की डोर में बँधना है
झूठ गिराता, सच उठाता
पूर्ववत् कर्म नर को बहकाता
पर दृढ़-संकल्प ही नर को बचाता
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आज-न कल सबको सच की डोर में बँधना है ।।1।।
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निरन्तर सत्-पथ पे जो चलता
उसके मस्तक पे ही तेज चमकता
झूठ की राह जिसने त्यागा
उसको ही सच मिला
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आज-न कल सबको सच की डोर में बँधना है ।।2।।
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झूठ की मिश्री जिसको अच्छी लगती
उसको भी सच, सच दिखाती
क्या खेल झूठ ने खेला अजब
सच की डोर में सब बँधा
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आज-न कल सबको सच की डोर में बँधना है ।।3।।
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क्या संकल्प नर को निखारता
हाँ, पर संकल्प नर को सत्य भी बनाता
क्या लिखना आसान है,
हाँ, संकल्प करना भी आसान है,
पर जिसका संकल्प हो महान
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आज-न कल सबको सच की डोर में बँधना है ।।4।
जय श्री सीताराम
आज-न कल सबको सच की डोर में बँधना है
Comments
3 responses to “आज-न कल सबको सच की डोर में बँधना है”
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निरन्तर सत्-पथ पे जो चलता
उसके मस्तक पे ही तेज चमकता
झूठ की राह जिसने त्यागा
उसको ही सच मिला
_________ सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हुई और झूठ को त्यागने का सुंदर सुझाव देती हुई कवि विकास जी की अति उत्तम रचना -
बहुत ही सुंदर रचना। वाह
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वाह
सुन्दर अभिव्यक्ति
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