ये मेरे देश के वीरों का लहु जो बहाया है
ये दर्द अब और ना सह पायेंगे
बात जिस भाषा में समझते हो तुम
बात उस भाषा में तुमको समझायेंगे
तुमने सोचा भी कैसे, हम कुछ ना करेंगे
ज़ुल्म झेला बहुत था पर अब ना सहेंगे
तुम्हारी हर ईंट का, पत्थर से जवाब होगा
बहुत सह लिया तुमको, अब इंक़लाब होगा
क़ुर्बानी उन वीर जवानो की बेकार नहीं होगी
जो नुक़सान किया तुमने उसकी भरपाई होगी
बलिदान उन वीर जवानो का बर्बाद नहीं होगा
बहुत सह लिया तुमको, अब इंक़लाब होगा
1962 में भी तुमने ख़ंजर इक घौपा था
फिर भी हमने भाई-भाई का बीज ही रोपा था
पर दोगलापन ये तुम्हारा और बर्दाश्त नी होगा
बहुत सह लिया तुमको, अब इंक़लाब होगा
अब इंक़लाब होगा, अब इंक़लाब होगा
#china ko jawaab
✍️ Rinku Chawla 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
इंक़लाब
Comments
11 responses to “इंक़लाब”
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वीर रस का सुन्दर प्रयोग , सुन्दर प्रस्तुति
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Jai hind
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Jai hind
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बहुत खूब
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सुंदर
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Jai hind
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जय हिंद जय भारत
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Jai hind
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जय हिंद
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सुन्दर
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Jai hind 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🙏🙏🙏🙏
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