इंसानियत को सीखना ही होगा

सब कुछ सिखा देगा इंटरनेट
मगर संस्कार तो घर से ही सीखने होंगे,
छोटे बच्चों को खेल लगाना,
उनकी चाहत को पहचानना,
उनकी भूख-प्यास का अहसास
ये सब तो सीखने ही होंगे।
बुजुर्गों का अदब,
उनका सम्मान,
कोई निर्णय लेने से पहले
उनकी भी राय ले लेना,
उनकी जरूरतों का ख्याल रखना
यह सब तो सीखना ही होगा।
दूसरे की पीड़ा को महसूस करना
दया भाव, मुहोब्बत करना,
निरीहों पर स्नेह लुटाना
यह सब तो सीखना ही होगा।
इंसान हो इंटरनेट के अलावा
इंसानियत को सीखना ही होगा।

Comments

5 responses to “इंसानियत को सीखना ही होगा”

  1. सटीक और बढ़िया रचना

  2. अति सुंदर

  3. Geeta kumari

    इंसान हो इंटरनेट के अलावा
    इंसानियत को सीखना ही होगा।
    ____इंटरनेट के युग में इन्सानियत की परिभाषा और उसका महत्व बताती हुई कवि सतीश जी की बहुत ही श्रेष्ठ रचना है। अच्छे संस्कार सीखने को प्रेरित करती हुई बहुत उत्कृष्ट रचना,उम्दा लेखन

  4. सब कुछ सिखा देगा इंटरनेट
    मगर संस्कार तो घर से ही सीखने होंगे,
    छोटे बच्चों को खेल लगाना,
    उनकी चाहत को पहचानना,
    उनकी भूख-प्यास का अहसास
    ये सब तो सीखने ही होंगे।
    इन्सानियत सिखलाती तथा सुंदर आचरण को अपनाने की बात करती हुई रचना

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