इंसान कहने योग्य हैं

यदि किसी भूखे को हम
दो कौर रोटी दे सकें तो
तब कहीं सचमुच में हम
इंसान कहने योग्य हैं।
दर्द के आँसू किसी के
पोंछ पायें, रोक पायें
तब कहीं सचमुच में हम
इंसान कहने योग्य हैं।
यदि किसी निर्धन का
बालक हो पढ़ाई में भला,
हम उसे सहयोग दें
इंसान कहने योग्य हैं।
मुंह चुराने की जगह
खोजें जरूरतमन्द को
हों मदद देने खड़े,
इंसान कहने योग्य हैं,
अन्यथा पशु और हम में
एक भी अंतर नहीं है,
सच नहीं वह बात हम
इंसान कहने योग्य हैं।

Comments

7 responses to “इंसान कहने योग्य हैं”

  1. वाह सर बहुत ही बढ़िया

  2. बहुत उम्दा

  3. Geeta kumari

    बहुत ही सुन्दर भावना है कवि सतीश जी की, यदि हम किसी एक गरीब बच्चे को पढ़ा सकें उसको योग्य बना सके तो जीवन ही सफल हो जाए । समाज के उत्थान की प्रेरणा देती हुई बहुत शानदार प्रस्तुति

  4. Praduman Amit

    बहुत ही सुन्दर।

  5. अति सुंदर

  6. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति

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