इतने कांटे पाए हैं मैंने राहों में ,
कि फूलों की चाह ना रही ।
इतने रास्ते बदले हैं मैंने पल-पल ,
कि मंजिल की चाह ना रही।
इतने कांटे पाए हैं…..
Comments
12 responses to “इतने कांटे पाए हैं…..”
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हृदय विदारक
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बहुत बहुत आभार 🙏 प्रज्ञा मैम
ऐसे ही हौसला बढ़ाते रहें। -
ह्रदय स्पर्शी रचना
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बहुत बहुत धन्यवाद
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सुंदर
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बहुत बहुत धन्यवाद सर
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कभी कभी कांटे ही फूल बन जाती है।
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धन्यवाद सर
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एक अच्छे काव्य की एक विशेष विशेषता होती है कि जो भी पाठक उसे पढ़ें ,वो पंक्तियां उसे अपने वजूद पर महसूस हो , उसे अपनी भावनाएं महसूस कराएं,
वह बात आपकी रचनाओं में है ऐसे ही लिखते रहें
बहुत सुंदर पंक्तियां -

बहुत सुंदर समीक्षा सर
प्रसंशा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद -
मंज़िल उन्ही को मिलती है जिनके सपनो में जान होती है,
पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है !
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🙏🙏
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