इतने कांटे पाए हैं…..

इतने कांटे पाए हैं मैंने राहों में ,
कि फूलों की चाह ना रही ।
इतने रास्ते बदले हैं मैंने पल-पल ,
कि मंजिल की चाह ना रही।

Comments

12 responses to “इतने कांटे पाए हैं…..”

  1. हृदय विदारक

  2. बहुत बहुत आभार 🙏 प्रज्ञा मैम
    ऐसे ही हौसला बढ़ाते रहें।

  3. Geeta kumari

    ह्रदय स्पर्शी रचना

    1. Pratima chaudhary

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. Pratima chaudhary

      बहुत बहुत धन्यवाद सर

  4. Praduman Amit

    कभी कभी कांटे ही फूल बन जाती है।

    1. Pratima chaudhary

      धन्यवाद सर

  5. मोहन सिंह मानुष Avatar

    एक अच्छे काव्य की एक विशेष विशेषता होती है कि जो भी पाठक उसे पढ़ें ,वो पंक्तियां उसे अपने वजूद पर महसूस हो , उसे अपनी भावनाएं महसूस कराएं,
    वह बात आपकी रचनाओं में है ऐसे ही लिखते रहें
    बहुत सुंदर पंक्तियां

  6. Pratima chaudhary

    बहुत सुंदर समीक्षा सर
    प्रसंशा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

  7. Deep

    मंज़िल उन्ही को मिलती है जिनके सपनो में जान होती है,

    पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है !

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