ख्वाहिशें !!!

ख्वाहिशें थी तुम्हें पाने की साहब !
पर बदनामी के सिवा कुछ ना हाथ आया..

Comments

11 responses to “ख्वाहिशें !!!”

  1. वाह, अतीव सुन्दर, क्या कहने

  2. Geeta kumari

    दिल की बातों को कैसे कागज़ पर इतनी खूबसूरती से उतार लेती हो।
    कमाल का हुनर है।

    1. बस दर्द ही इतना है कि हर बात पर कविता लिख सकती हूं

  3. Praduman Amit

    काफी लाजवाब है।

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar

    सुन्दर पंक्तियां

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