इश्क़ अधूरा है क्यों अब तलक हमारा

इश्क़ अधूरा है क्यों अब तलक हमारा

उजालों को नफरत है क्यों, फैला है अँधेरा

इश्क़ में जलकर, चलो चांदनी रात करें

आओ हम मोहब्बत क़ी बात करें

Comments

10 responses to “इश्क़ अधूरा है क्यों अब तलक हमारा”

  1. Abhishek kumar

    सुन्दर रचना

  2. Abhishek kumar

    Best

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