उत्साह हो सजा हुआ

जिस राह पर कदम बढ़ें
बिंदास भाव से बढ़ें
उत्साह हो सजा हुआ
थकें न पग चले चलें।
न देखना इधर उधर
नजर रहे मुकाम पर,
सदा बुलंद हौसला
चले चलें सुकाम पर।

Comments

19 responses to “उत्साह हो सजा हुआ”

    1. सादर धन्यवाद

  1. बहुत बढ़िया

    1. सादर धन्यवाद

  2. Praduman Amit

    Very nice

  3. Geeta kumari

    अरे वाह! बहुत सुंदर
    “नज़र रहे मुकाम पर,… चल चलें सुकाम पर” कविता की पंक्तियां सकारात्मकता की और प्रेरित करती हैं।👏

    1. आपकी विद्वत्ता को सैल्यूट है, आपकी पारखी नजर कविता के मुख्य बिंदु पर रहती है, इस बहुमुखी प्रतिभा को अभिवादन

      1. Geeta kumari

        🙏🙏

  4. Indu Pandey

    very nice

    1. Satish Pandey

      Thanks

  5. Devi Kamla

    बहुत अच्छा लिखा है

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद जी

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