उम्र भर पछताते रहे

तुम्हारे होठों पर वो लफ़्ज़
कभी ना आए
जो हम सुनने के लिए बेकरार रहे
मिलने तो रोज आते रहे तुम
पर दिल के जज्बात
कभी ना कहे
देने को रोज
लाते रहे गुलाब तुम
पर हमेशा पीठ के
पीछे छुपाते रहे,
कहा नहीं जो कहना था मुझसे
बस यूं ही उम्र भर पछताते रहे।

Comments

8 responses to “उम्र भर पछताते रहे”

  1. अतिसुंदर भाव 

  2. राकेश पाठक

    Nice

    1. Pragya

      Thanks a lot

  3. Praduman Amit

    बेचारा चाह कर भी चुप रहा। किसी को चाह के रहना भी कोई खता तो नहीं।

    1. Pragya

      आभार आपका

    1. Pragya

      धन्यवाद

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