उड़ा खुशबू

हजारी खिल, उड़ा खुशबू
बुला भंवरा, सुना संगीत।
भेज संदेश, प्यारा सा,
बुला तू अब, मेरा मनमीत।
रही है जो, भी चाहत सी
उसे मकरंद में रखकर
सुगंधित कर फिजायें सब,
बढ़ा दे ना, परस्पर प्रीत।
मौसम गया, बरसात का
शरद रितु है, मुहाने पर,
बुला दे प्रिय, को मेरे
न आया जो, मनाने पर।
शब्दार्थ –
हजारी – गेंदा

Comments

10 responses to “उड़ा खुशबू”

  1. अति सुंदर

    1. बहुत बहुत धन्यवाद जी

  2. अतिसुंदर रचना

    1. सादर धन्यवाद जी

  3. लाजवाब पंक्तियां

    1. बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी

  4. अतीव सुन्दर, वाह वाह,नए तरह की पंक्तियाँ

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  5. Geeta kumari

    शरद ऋतु के आने की बहुत ही सुन्दर पंक्तियां ।
    “हजारी खिल, उड़ा खुशबू बुला भंवरा, सुना संगीत।भेज संदेश, प्यारा सा,बुला तू अब, मेरा मनमीत”
    गेंदा के फूलों की सुगंध और भंवरे के संगीत से वातावरण गुंजायमान है
    बहुत ही खूबसूरती से संदेश भेजने की बात कही है कवि ने
    अतीव सुंदर रचना ,शानदार प्रस्तुति

    1. कविता के भाव को समझ कर की गई इस खूबसूरत समीक्षा हेतु आपका हृदय तल से आभार, लेखनी की यह प्रखरता बनी रहे। जय हो

Leave a Reply

New Report

Close