“पीर मोहब्बत की”

कभी झाँककर देखो
मेरे दिल की गहराई

तुम भी रो पड़ोगे देख !
मेरे यार की रुसवाई

पीर मेरी मोहब्बत की
बस जानता है वो !

जिसने उम्र भर मोहब्बत में
फकत दिल पे चोट है खाई

Comments

7 responses to ““पीर मोहब्बत की””

  1. बहुत खूब, सुन्दर अभिव्यक्ति

  2. बहुत उम्दा

  3. Geeta kumari

    बहुत ख़ूब हृदय स्पर्शी रचना

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